यहॉ पर मेरा मतलब "आप"पार्टी से नहीं बल्कि भारत के मतदाता से है।इस बार दिल्ली चुनाव में मतदाता ने अपने वास्तविक स्वरुप का पहचान कराया है।मैं कोई पार्टी का समर्थक नहीं हूॅ,फिर भी मुझे एक बार भाजपा के सफाये पर दु:ख हुआ,लगा ऐसे निर्णय से,काम करने वाले मोदी जी निराश हो जायेंगे,लेकिन बाद में विचार किया तो पता चला कि,दिल्ली की जनता ने मोदी जी की बात को ही माना है,उन्होंने ही कहा था " जिसको जो काम करने आता है,उसे वह काम दिजीये "
दिल्ली की जनता के नजर में केजरीवाल दिल्ली में शासन करने के लिये,उपयुक्त व्यक्ति दिखे,उसने उन्हें चुन दिया।केन्द्र और भारत क् लिये मोदी जी हैं ही,एक अच्छायी जो केजरीवाल में है,उसे कोइ नकार भी नहीं सकता है,वह यह कि उन्होंने मोदी के किसी काम का बिरोध नहीं किया ।मेरा भी मानना है कि जब सब भारत के कल्याण का दावा करते हैं,तो विरोघ कैसा ।यह कहना कि दिल्ली के चुनाव परिणाम,देश को प्रभावित करेंगें ,गलत है,हर प्रान्त में केजरीवाल पैदा नहीं हो सकता,हर प्रान्त में मोदी भी पैदा नहीं हो सकता,मतदाता ये जान चुका है कि,पार्टीयों के कार्यकर्ता केवल उतनी दूर तक ही संयमित रहते हैं,जहॉ तक उसके नेता की नीगाहें पहूॅच पाती हैं,ऑखो से एओझल होते ही,उनकी हरकतें,क्लासरुम में पीछे के बेंच पर बैठे छात्र की भॉती हो जाती है,जो क्लास में रहता जरुर है,लेकिन सुनता समझता कुछ नहीं,अगर ऐसा न हुआ होता ,,तो अमीतशाह की योजनानुसार दिल्ली का हर मतदाता,भाजपा कार्यकर्ता के सम्पर्क में होता। एक बात जो समझने लायक है,वह यह कि न तो मोदी जादूगर हैं,न केजरीवाल मतदाता जानता है या यों कहें कि अब जान गया है कि,सब हाथ की सफाई दिखलाने वाले हैं,जब तमाशा ही देखना है तो स्थिर सरकार का तमाशा क्यों न देखें,
मोदी जी को अपने हर कार्यकर्ता को मोदी बनाना होगा
और केजरीवाल को हर कार्यकर्ता को केजरीवाल
अन्यथा मतदाता तू नहीं और सही,और नहीं और सही का रास्ता पकड़ चुका है,बहुमत देकर ही सरकार बनवावेगा चाहे कोई विकल्प बन जाय।
Wednesday, February 11, 2015
आप मतदाता हैं
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