मै भारत की किस नम्बर का नागरिक हूॅ,कह नहीं सकता,लेकिन इस बात का आभास है कि,भारत के राष्ट्रपति को,प्रथम नागरिक कहा जाता है,जब किसी को एक नम्बर मील गया तो मेरा भी कोइ नम्बर होगा ही ऐसा मेरा विश्वास है।
नम्बर कोइ हो,लेकिन समाज के प्रति जिम्मेदारी से कोई नागरिक ईन्कार नही कर सकता।
आज जिस तरह से हम ठगे जा रहे है,जिस सम्मोहन में हमें जकड़ लिया गया है,उससे मुक्त होने के लिये,जो रास्ता हैउसे अपनाने के लिये हम तैयार ही नहीं है
एक साधारण बात जिसे गाॅधी ने बताया
बुरा मत देखो
बुरा मत सुनो
बुरा मत कहो
अगर ये तीनो बात हम मानते तो ,नेताओं को देखने और सुनने वाली भीड़ गायब रहती
और बुरा कहने वाले नेता,केवल रेडियो
और टीबी का, सहारा, लेते,,,,
Thursday, February 5, 2015
माया जाल
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