कोई भी राजनैतिक पार्टा के पास,चन्दा छोड़कर कमाई का कोई जरीया नहीं है।
जाहिर है ,जब भगवान को एक किलो लड्डू चढ़ाकर,भक्त लाखों की आशा रखते हैं,तो करोड़ों का चन्दा देकर,अरबों की आशा रखते हैं तो बुरा क्या है।
जागरुक जनता,चुनाव आयोग,किसी को इस बात की चिन्ता नहीं है कि चुनाव की प्रक्रिया और व्यवस्था को इतना आसान और कठोर बना दिया जाय कि इस सब की कोई जरुरत न रहे।
पार्टायॉ उत्पादन के अवसर बढ़ाकरस्वयं लाभ क्यों नहीं कमाती हैं,उसी लाभ से वह अपना खर्च चलाती,अपने कार्यकर्ताओं को स्थाई नौकरी प्रदान करती,ताकी उनको अपना जीवनयापन करने के लिये,जनता की और नेता की न तो दलाली करनी पड़ती,ना किसी को ठगना पड़ता
अपने बल पर चुनाव लड़ना,अपने खर्च पर देश भक्ति का दावा अगर कोई पार्टी कर सकती है,तो माना जा सकता है कि।इनमें कुध करने का जज्बा है
अन्यथा इनमें और हफ्ता वसुल कर सुरक्षी देने वाले रंगबाजों में अन्तर क्याहै
Thursday, February 5, 2015
कमाई भीख की,खर्चा शाहनशाहके
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